Friday, November 14, 2008

गुलाबी ठंड

आज इस मौसम की पहली ठंड मेह्सूस की मैने। बाहर बागीचे मे बैठे बैठे शाल की जरुरत लगी। साथ ही हूआ एक भीना भीना सा अह्सास कि कुछ मदमाने की रितु आ गयी है। इस हल्की ठंड मे शाल की गरमाहुट , मानो किसी ने भीतर तक दिल को गुदगुदा दिया हो। एसा लगा कि कुछ बढिया पह्नना जाए और खाया जाए। उस पर भीनी भीनी फूलों की खुश्बू । बस स्वर्ग का सा एह्सास हुआ। अब बस मस्ती करनी है।   

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